You are here
Home > Culture

उत्तराखंडी के प्रमुख पारंपरिक आभूषण

उत्तराखंड के प्रचलित प्रमुख आभूषण जो अलग पहचान से संस्कृति की झलक बताते है।सोने के ये पारंपरिक आभूषण आज भी उत्तराखंड के मूल निवासियों में लोकप्रिय हैं माँगटीका सुहागन स्त्रियां मांग में पहनती हैं.सोने का आभूषण है ये.सौभाग्य का प्रतीक शीशफूल मॉगटीका के साथ ही सिर पर पहना जाता है..विशेषत: चाँदी का बना होता है. बुलाक स्वर्ण आभूषण..नाक में पहना

उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत भिटोली और यादें अतीत की

उत्तराखंड की सांस्कृति भिटौली उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में हर साल चैत्र में मायके पक्ष से भिटौली दी जाती है। इसे चैत्र के पहले दिन फूलदेई से पूरे माहभर तक मनाया जाता है। भिटौली का सामान्य अर्थ है भेंट यानी मुलाकात करना। उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों, पुराने समय में संसाधनों

उत्तराखंड के कुटी गांव का नजारा

उत्तराखंड का एक ऐसा अनोखा गांव कहते है की जिंदगी अपने ढंग से जीने का एक अलग ही मज़ा है कुटी गांव उत्तराखंड: धारचूला के व्यास वैली का खूबसूरत गांव कुटी 12'500 फिट की ऊंचाई में स्थित हैं. गांव में आय का मुख्य साधन कृषि हैं.कुटी से ही16 किमी का

देवप्रयाग

देवप्रयाग भारत के उत्तराखण्ड राज्य में स्थित एक नगर एवं प्रसिद्ध तीर्थस्थान है। यह अलकनंदा तथा भागीरथी नदियों के संगम पर स्थित है। इसी संगम स्थल के बाद इस नदी को पहली बार 'गंगा' के नाम से जाना जाता है। यहाँ श्री रघुनाथ जी का मंदिर है, जहाँ हिंदू तीर्थयात्री

उत्तराखंड पहाड़ का लोक उत्सव सातूं-आठूं

पहाड़ का लोक उत्सव 'सातूं-आठूं' ********* देव-भूमि कहे जानेवाले उत्तराखंड में ऐसा ही एक पर्व है सातों-आठों या सातूँ-आठूँ। भाद्रपद मास में अमुक्ताभरण सप्तमी को सातूं, और दूर्बाष्टमी को आठूं मनाया जाता है। भाद्रपद मास में सातूं-आठूं कृष्ण पक्ष में

उत्तराखंडी के प्रसिद्ध पारम्परिक लोक वाद्ययंत्र वाद्ययंत्र

उत्तराखंड राज्य अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए पूरे संसार में प्रसिद्ध है । यहाँ के वाद्य यंत्र हम सभी को थिरकने के लिए मजबूर करते हैं । तो आइए हम भी जाने यहाँ के वाद्य यंत्रों के बारे में ।उत्तराखंड राज्य अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए पूरे संसार में प्रसिद्ध

उत्तराखंड का लोक नृत्य – चाँचरी(झोड़ा)

यह नृत्य, स्त्री-पुरुषों द्वारा किए जाने वाला एक सामूहिक नृत्य-गीत है।.यह उत्तराखंड के प्रमुख लोक नृत्यों में से एक हैं। कुमाऊं क्षेत्र में इस नृत्य को झोड़ा कहते है उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र की झोड़ा चाँचरी बहुत ही प्रसिद्ध है।किसी भी शुभ कार्य के अवसर पर झोड़ा चाँचरी देखने को

गंगनाथ देवता मंदिर कांडा धपोली (बागेश्वर)

kanda2

गंगनाथ जी पूरे उत्तराखण्ड में भगवान की तरह पूजे जाते है। और उनके लाखो भक्त भी है। उत्तराखण्ड में गंगनाथ जी की कथा को एक गीत के माध्यम से उनकी पूजा में जगरी के द्वारा गाया जाता है। उत्तराखंड के कुमाऊँनी लोकनृत्य में लोकदेवता पर आधारित श्री गंगानाथ जागर

मातृ शक्ति संस्कृति का दर्पण कार्यक्रम

जीवन कला संगम समिति मेहरागाव के द्वारा श्रीनंदा देवी महोत्सव समिति के साथ मिलकर अगामी 11 मार्च 2018 को गजराज होटल सभागार गजराज मार्केट मेन बाजार भवाली में मातृ शक्ति संस्कृति का दर्पण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। जिसमे सामाजिक संस्कृति व अनय क्षेत्रों मे कुशल कार्य कर रही

ऐपण ~ उत्तराखंड की विश्व विख्यात परंपरागत कला

ऐपण पारम्परिक हस्तकला उत्तराखंड की संस्कृति में रची बसी एक प्रचीन कला है उत्तराखंड की संस्कृति में विभिन्न प्रकार की लोक कलाएं मौजूद है। उन्ही में से एक प्रमुख कला पारम्परिक हस्तकला ऐपण भी है उत्तराखण्ड की पारम्परिक हस्तकला ऐपण का दीवाली पर्व में विशेष महत्व है। ऐपण कलात्मक अभिव्यक्ति का

Top
); ga('require', 'linkid', 'linkid.js'); ga('set', 'anonymizeIP', true); ga('set', 'forceSSL', true); ga('send', 'pageview');
error: Content is protected !!