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सहजधारी सिख नेगी

रीठाखाल, पौड़ी गढ़वाल के बगल में एक रमणीक गांव है- बिजोली। वहाँ विना पगड़ी वाले, जिनको सहजधारी सिख कहते हैं, उन लोगों के परिवार रहते हैं। वे नेगी लोग मुण्डन(सिर के बाल कटवाने) के अतिरिक्त हिन्दू धर्म के अनुसार ही अपने शेष सभी पंद्रह संस्कार करते हैं। बिजोली गांव के ऊपर

धरती पर स्वर्गलोक पांडव-खोली

द्वाराहाट ( अल्मोडा़ ) से 25 km आगे है ये विस्मरणीय स्थल ।। जहा़ 4 km की चडा़ई है और अंत मे आता है एक विहंगम दृश्य जो कठिन रास्ते की थकान को पल मे गायब कर देता है ।।।महाभारत कालीन घटनाओं से जुड़े समुद्रतल से 8800 फुट की ऊंचाई

गढ़वाल में राजपूत जातियों का इतिहास

गढ़वाल  क्षेत्र में निवास करने वाली राजपूत जातियों का इतिहास काफी विस्तृत है। यहां बसी राजपूत जातियों के भी देश के विभिन्न हिस्सों से आने का इतिहास मिलता है। 1-परमार (पंवार)-इनकी पूर्व जाति परमार है। ये यहां धार गुजरात से सम्वत 945 में आए। इनका गढ़ गढ़वाल राजवंश है। 2-कुंवरः ये पंवार

राइफलमैन जसवंत सिंह रावत हीरों ऑफ़ नेफा चीन युद्ध की कहानी

यह सच्ची गाथा है एक वीर सैनिक की। भारत मां के इस सच्चे सपूत की जिंदगी तो देश की रक्षा के लिए समर्पित थी ही, यह सैनिक शहीद होने के बाद भी आज तक सीमा की सुरक्षा में लगा है। यह जांबाज सैनिक था जसवंत सिंह रावत। इसकी बहादुरी के

ऋषिकेश के राजेश चंद्र द्वारा बनायीं गयी उत्तराखडं की बेहतरीन कलाकृति

  उत्तराखंड   ऋषिकेश के राजेश चंद्र इस वक्त देहरादून के मिनेर्वा इंस्टिट्यूट ऑफ़ मॅनॅग्मेंट एंड टेक्नोलॉजी से डिग्री ले रहे हैं। बचपन से ही कला में रुचि रखने वाली राजेश  शायद हमेशा से जानते  थे कि उन्हें कला के क्षेत्र में आगे बढ़ना है और तभी शुरु से ही उन्होंने इसमें प्रोफेशनल

राजुला-मालूशाही

राजुला-मालूशाही उत्तराखंड हिमालयी क्षेत्र की एक अमर प्रेम कहानी है. प्रेम के प्रतिरोधों, विरोधों, विपरीतपरिस्थितियों, समाज एवं जातिगत बंधनों में उलझ कर सुलझ जाने वाली इस कहानी में प्रेम पथिकों को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा........जरूर पढ़ें!!!! उत्तराखंड में जब कत्यूर राज वंश के के राजा दुलाशाह का शाशन और राजधानी

गढ़वाल की बहादुर महारानी कर्णावती “नाक काटी रानी”

इतिहास के पन्नों के बीच एक और गाथा दर्ज है।मुगल सैनिकों की नाक काटने वाली गढ़वाल की रानी कर्णावती गढ़वाल की बहादुर महारानी कर्णावती "नाक काटी रानी" गढ़वाल राज्य को मुगलों द्वारा कभी भी जीता नहीं जा सका.... ये तथ्य उसी राज्य से सम्बन्धित है. यहाँ एक रानी हुआ

पौड़ी अतीत के झरोखे से

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पौड़ी अतीत के झरोखे से। भारतीय उपमहाद्वीप में मानव संस्कृति का इतिहास जितना पुराना है उतना ही पुराना इतिहास गढ़वाल के हिमालयी क्षेत्र का भी है. ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार उत्तराखंड के पहाड़ों में सबसे पहले राजवंश ‘कत्यूर राजवंश’ का जिक्र मिलता है. कत्यूरों

बद्रीनाथ धाम

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बद्रीनाथ धाम, उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है| बदरीनाथ मंदिर , जिसे बदरीनारायण मंदिर भी कहते हैं,। यह मंदिर भगवान विष्णु के रूप बदरीनाथ को समर्पित है। यह हिन्दुओं के चार धाम में से एक धाम भी है। बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड के साथ ही साथ देश के

नैनीताल के ऐसे डीएम जिन्होंने यहां तक का सफर तय करने के लिए 25 रुपये की मजदूरी तक की

कम ही लोगो को पता होगा की अपने बुलंद होसलो और मजबूत इरादों से विनोद कुमार सुमन ने कामयाबी पायी है हौंसले बुलंद हों तो कामयाबी जरूर मिलती है। जिनके इरादे मजबूत होते हैं उनकी राह में गरीबी भी बाधा नहीं डाल पाती। 1997 में पीसीएस और 2008 बैच

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